मित्र ( दोस्त) क्या है??
मित्र एक दुआ है,
इच्छा या अनुरक्ति नही |
मित्र एक सलाह है,
अधिकार या प्राप्ति नही |
मित्र एक ऐसी परिष्कृत,
भावना है जो आपको,
एक गहन चेतना मे प्राण
देकर, आलोकिक दृश्य प्रदान करता है |
मित्र स्वयं मे पूर्ण,
उपमा से परे ,
मित्र सुदामा,
मित्र कृष्ण हैं |
रात्रि मे चन्द्रमा सा,
प्रकाशित भाव है |
मित्र दैवीय कृपा,
देव का प्रसाद है |
जहाँ खोट नही,
जहाँ दम्भ नही |
मित्र साधन हैं,
उस साध्य जगत का ,
जो जीवन का ,
उद्देश्य रहा |
कहने को बहुत है ,
मित्र जहाँ पर,
कृष्ण हमेशा एक
रहा |