अगर अदा से दूर रहे,
अपनी बला से दूर रहे।
हम भी मरीज़ ए इश्क़ तो थे,
मगर दवा से दूर रहे।
फ़ितरत से बदचलन थी जो,
हम उस हवा से दूर रहे।
मक़तल जाकर मौत मिली,
किसकी दुआ से दूर रहे।
शामिल था जिसमें बाज़ार,
हम उस वफ़ा से दूर रहे।
रेत से जिसकी यारी थी,
उस दरिया से दूर रहे।
अपने ख़ुदा के थे नज़दीक,
सबके ख़ुदा से दूर रहे।
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
Courtesy ~ Sufi Surendra Chaturvedi ji.