जब गिरे तो हमें संभाला
उंगली पकड़के चलना सिखाया
जिम्मेदारियों का फर्ज निभाया
अब जब तेरा वक्त आया
हाथ पकड़ के उन्हें संभालने का
तू ने तो क्या खूब रिश्ता निभाया
बुढे माँ-बाप को वृद्धाश्रम छोड़ आया
जिम्मेदारियाँ को 'भार' का नाम अब तूने दिया
सारे रिश्ते-नाते भूला दिया
अलग अपनी दुनिया बसा लिया
माँ-बाप तो फिर भी माफ करेंगे सदा
अपनी सारी जिम्मेदारियाँ निभाएंगे यहाँ
लेकिन याद रख ये कुदरत किसी को छोड़ती नही यहाँ
चुन चुन के बदला लेते ही हर एक से यहाँ
आज जो तूने किया कल वो ही होगा तेरे साथ यहाँ
#भार