ए खुदा ये कया सितम ढाया हमपे
जिनको चाहते है उसे पा न सके
और जो हमे चाहते है उसके हो न सके
कुछ तो रहम कर इस दिल पे
उनकी यादों को मिटा दे इस दिल से
कुछ और नही तो इतना कर दे
जो हमे चाहते उन्हें तो खुश कर दे
नाखुश भले ही हम रहे
किसीको तो खुशी दे पाए
बाकी इस दिल का क्या है
कम्बख्त समझता ही नही है
बिता समय और प्यार कहाँ वापस आता है