काव्य यहाँ है, मंच यहाँ
है कवि उनकी अनंत सीख यहाँ
कभी पिता का प्यार यहाँ, तो
कभी माँ का दुलार यहाँ ।
कभी प्रेम के रस है बहते, तो
कभी अनंत दुख दर्द यहाँ
गहरे है सबके जज़्बात
है गहरी उनकी हर बात यहाँ
ना हि कोई रोक
न किसी का टोक
निश्चल भव्य सागर में
गोते लगाते सबके काव्य यहाँ
सोच विचार के इस जगत में
कभी सूर्य, कभी चाँद यहाँ
बवंडर बन जब जाता हृदय
तब फूटकर उभरती महाकाव्य यहाँ
बस दिल कि आवाज़ को
स्याही में उतारकर
पन्नो में रचते रचनाकार यहाँ