कहाँ तक तुझपर प्यार जताऊँ
बता और कितना याद आऊँ
तू पूछे तो हाल मेरा
लाजमी है मैं तुझे बताऊँ
तू वादा कर आगाज का
मुमकिन है मैं मान जाऊँ
मैंने इन्कार तो कर दिया
तू बुला शायद आ जाऊँ
ये किताबें परेशाँ करती हैं
तू पढाए,अव्वल आ जाऊँ
ये दोस्त मेरी ज़िन्दगी हैं
इन्हें ठुकरा के कहाँ जाऊँ
तेरी बातें परियों की हैं
कान खोलूँ समझ न पाऊँ
तेरे पायल की झंकार सुनके
चलता हुआ मैं रुक जाऊँ
गुरूर बहोत है जानता हूँ
तू कहे,अभी झुक जाऊँ
तेरी यादें बेहद आती हैं
कभी मैं तुझे याद आऊँ
कभी तू मेरा शेऱ पढ़े
कभी मैं तुझे गज़लें सुनाऊँ