* Forwarded but very true message *
*सांवत्सरिक प्रतिकमण से पूर्व इतना जरूर चिंतन करें*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*● द्वेष के दावानल से अग्निशर्मा ने और वैर के विषपान से कमठने अपनी ही साधना का विनाश किया.*
*◆ क्षमा के आलंबन से चंड कौशिक ने और मिच्छा मि दुक्कड़म् से चंदनबाला ने अपनी साधना का विकास किया.*
*◆ पर्वाधिराज पर्युषण का प्राण है सांवत्सरिक प्रतिकमण और सांवत्सरिक प्रतिकमण का सार है क्षमापना.*
*◆ माफी मांगनेवाला आराधक है...*
*माफी देनेवाला आराधक है... यह वचन प्रभुवीर के है जिसे आज हृदय में भरकर प्रतिकमण करना है.*
*◆ सबको माफ करो*
*स्वयं को साफ करो.*
*सांवत्सरिक मिच्छा मि दुक्कड़म्*