और हां एक और बात....
अब तुम्हे पसंद आने के लिए खुद को नहीं बदल पाएंगे,
हम काफ़ी मुश्किलोंसे जाके अब जो खुदको पसंद आए है।
तुम्हे अगर नहीं पसंद हमारा तरीका,
तो अब तुम ही नज़र बदल लो ,
बहुत ठोकर खाकर अब हम इस अंदाज़ में आए है।
खामियां ढूंढोगे तो खुद में भी मिलेंगी,
जान रही तो ज़िन्दगी चलती रहेगी,
ना मिली इजाज़त तो अब नहीं मिलेंगे,
पर तुमसे नज़र मिलाने के लिए अब खुद की नज़रों में नहीं गिरेंगे।
शब्दों से चाहे तो अब बात मत करना ,
हम खामोशियां जो पढ़ने लगे है,
तुम्हारे हर एक खुशी और गम को बाटेंगे अगर चाहोगे ,
पर अब खुद सामने आ के अपने होने का अहसास नहीं करा पाएंगे।
आपकी पसंद नापसंद को खुद के बाद रखने लगे है ,
तब कहीं जाकर खुद से मिल पाए हैं,
अब बदलने की बात हमसे मत करना,
हम शून्य से थे अब जाकर कहीं अनंत में आए है ।
श्रद्धा