जय सदगुरूदेव 🙏
गुरू मात - पिता तुम भाई सखा, बहुविध विचार कर देख लिया | तुम ही प्रिय, प्रियतम, प्रीत तुम्ही | तुम प्यास मेरी और एक नदी , आधार तुम्हीं अवधार तुम्ही, तुम्हरे अतिरिक्त नही कोई | तुम शब्द मेरे शब्दांश तुम्ही, भावो मे हो भावांश तुम्ही |
#बहुविध