जाग
ओ मानव, तेरी गहरी नींद से तू जाग ;
वरना नष्ट कर देगी तूझे यह आग
भस्म हो जायेगा तेरे सपनो का सुनेहरा बाग;
जो बनाया था तुने, करके मेहनत अथाग ।
पड जायेगा तेरे चरित्र पर एक न मिट ने वाला दाग
अहम, अभिमान, खुदगर्ज़ी और बेदिली त्याग;
वरना हो जायेगा तु फना, अब तो तेरी गहरी नींद से जाग ।
Armin Dutia Motashaw