आज हम अपनी दुआओं का असर देखेंगे,
तीर-ए-नज़र देखेंगे, ज़ख्म-ए-जिगर देखेंगे...
आप तो आँख मिलाते हुए शरमाते हैं,
आप तो दिल के धड़कने से भी डर जाते हैं
फिर भी ये ज़िद्द् है के हम ज़ख्म-ए-जिगर देखेंगे, तीर-ए-नज़र देखेंगे, ज़ख्म-ए-जिगर देखेंगे...
प्यार करना दिल-ए-बेताब बुरा होता है,
सुनते आये हैं के ये ख्वाब बुरा होता है.
आज इस ख़्वाब की ताबीर मगर देखेंगे,
तीर-ए-नज़र देखेंगे, ज़ख्म-ए-जिगर देखेंगे.
जानलेवा है मुहब्बत का समा आज की रात,
शमा हो जयेगी जल जल के धुंआ आज की रात.
आज की रात बचेंगे तो सहर देखेंगे,
तीर-ए-नज़र देखेंगे, ज़ख्म-ए-जिगर देखेंगे.
From the great movie PAKIZAA.
(SPACIAL FOR 'WHAT IS WOMAN'.)
:- Kaif Bhopali.