तेरे चहेरे पर हजारों चाँद का नूर हैं
तरसे निगाहें मेरी तो क्या कूसूर हैं
बागबाँ भी खुश हैं देखकर गुलशन को
हर फूल पर छाया मौसम का सुरुर हैं
दबे पाँव आकर वो देते हैं दस्तक जो
हजारों ख्वाइशों का सच होना मंजूर है
खुशबू मेरे बदन में छाइ हैं तेरे छूने से
इत्र का भी गुरूर आज तूटना जरूर हैं
इबादत का मुझे कोई इल्म नहीं है मगर
मुहब्बत में न सोचे कुछ दिल का दस्तूर है..