तुम ही शिव हो तुम ही सक्ति,
आपो तुम्हारे चरणों की भक्ति,
अनहद रचके तुमको रीजाउँ हे मेरे भोलेनाथ,
सारंग रचके तुमको रीजाउँ हे मेरे भोलेनाथ,
पिंगल की झांझरी से सजाउँ हे मेरे भोलेनाथ,
डिंगल के डमरू को बजाऊँ हे मेरे भोलेनाथ,
छंदों की गंगा बरसाउँ हे मेरे भोलेनाथ,
दोहा की बनाउँ रूद्रमाला हे मेरे भोलेनाथ,
सोमवार को सोमवासरीय से सजाउँ हे मेरे भोलेनाथ,
श्रावण को दुध से स्नान कराउँ हे मेरे भोलेनाथ,
बिली के पन्नों से ज्योर्तीलींग को सजाउँ हे मेरे भोलेनाथ,
पार्वतीपति करीये हमारे दुखो का नाश हे मेरे भोलेनाथ,
कार्तिकेय के तात दिजीये सुख मे र्वुध्धी हे मेरे भोलेनाथ,
गणेशजी के तात दिजीये सुध्धी बुद्धि हे मेरे भोलेनाथ,
ओखामाँ के तात दिजीये शिवरुपी मति हे मेरे भोलेनाथ,
बस मे नहीं हमारे कलियुग का वार हे मेरे भोलेनाथ,
जगत के तारणहार अब आइए हे मेरे भोलेनाथ,
अंतः समय खोलिएगा मोक्ष के द्वार हे मेरे भोलेनाथ,
चारणर्कुत रचना को करें स्वीकार हे मेरे भोलेनाथ,