मेरी मानस तरंगेे,
पता नहीं तुम्हें
क्यों न भुला पाई।
एक बार आज फिर,
तुम्हारी याद आयी।
बरसों बीत गये,
तुम्हें देखे,
बातें भी न,
कोई हो पाई।
एक बार आज
फिर तुम्हारी याद आयी।
मैं मिला नहीं,
तुमसे बहुत।
बात भी कोई,
खास न हो पाई।
पर क्या ऐसी
खास बात थी तुम में।
कि एक बार आज,
फिर तुम्हारी याद आयी।