पहिया उम्र का ये कभी,
आगे बढ़ने नहीं देते,
बचपन कभी ये मिटने नहीं देते,
वक्त को लेते हैं जो थाम,
ऐसे ही जिद्दी और मस्तमौला,
होते हैं ये दोस्त।
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यूं तो खुशियां बिखरी हैं
जमाने में हर ओर,
पर मैं इन्हें ढूंढने जाऊं क्यों
जब खुशियों का खजाना हैं
मेरे दोस्त!!
सरोज ✍️
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