पहले जैसी बात नहीं
अब वो रात भी नहीं
सब दोस्त साथ मिलकर
जगते थे जब पुरी रात
एक्जाम की पढ़ाई के बहाने
करते थे खूब धमाल
याद करते ही आ जाते सामने
ऎसे जुड़े होते थे जज्बात
अब वो जज्बात कहाँ
पहले जैसी बात कहाँ
गुम हैं सब जवाबदारी में
खो गये अब दुनियादारी में
पुराने दोस्त बहोत याद आते हैं
जब दिखावे के लिए मुस्कुराते हैं