यादें जो दिल की
मरहम के जैसी,
अभी तो आप यही थी,
फिर ये यांदे किसकी।
ना दिल में सुकू है,
ये कैसी गुफ्तगू है।
मेरे सामने तू है,
फिर किस की आरजू है।
तेरी जो ये कमी है,
मेरे आंखो में नमी है।
बरसती है यादें भी,
सावन की नमी है।
तेरी वो आंखे,
बताओ भूले कैसे,
उन आंखो की ही
ये सारी कामी है।
मेरी जिंदगी वहीं है,
जहा तेरी असल जिंदगी है।
तू कहता है यादें ही तेरी,
मेरे ज़हन में बसी है।
बहुत कुछ होता है,
कहने को तुझ से,
उन यादों के बारे में
क्यो इतनी खामोशी है।
तेरी मोहब्बत ने मुझे,
इस क़दर शांत किया है।
कितना भी यादें कोलाहल करे
मेरे मुंह से कुछ निकल ना पाया है
यादें को क्या कहे आप की,
कभी दिन में रात कर देती है
कभी रात में ये मुझे,
रात भर जगाती है।
हर ख़्वाब होता है याद में
उसके साथ बस नहीं,
किसी की नज़र जरूर लगी,
नहीं इस कदर वो मुझ से दूर ना होता।
वंदना सिंह