ख्वाहिश-ए-मुस्कुराहट भी रखना
सफर में काम आएगी।
हमसफर साथ होगा
पर दुख की घड़ी में यही रास आएगी।
यकीन-ए-हमसफर जरूरी है
शंका तो यूं ही बदनाम है।
गुमां-ए-इश्क इतना भी न कर
एक चेहरा गुमनाम है
दर्द-ओ-गम में ही नजर आता है।
परवाना तो शमा से दिल लगाता है
आग की लपटें कहां देख पाता है।