# विषय .दिल "
# विधा .कविता **
हरेक दिल में ,महकती कोई फूलवारी है ।
हरेक दिल में ,सुलग रही कोई चिंगारी है ।।
हरेक दिल में ,तडप रही कोई दिलदारी है ।
हरेक दिल में ,चहकती कोई किलकारी है ।।
हरेक दिल में अदाएँ है ,कुछ अदाकारी है ।
हरेक दिल में करारों ,की बेकरारी है ।।
हरेक दिल में सुर है ,लय है ,चित्रकारी है ।
हरेक दिल में कुछ ,अजीब सी फनकारी है ।।
हरेक दिल में ,कोई शक्ति अहंकारी है ।
हरेक दिल में ,थोड़ी सी मक्कारी है ।।
दिल में सब कुछ है ,मगर कैसी मजेदारी है ।
सामने खुल के कभी ,कोई नहीं आता है ।।
कोई तो बात है ,जिसकी परदादारी है ।
कुछ शर्म के खातिर ,दिल की नाअदाकारी है ।।