जब मनुष्य के जीवन की औसत आयु
सौ वर्ष मानी जाती थी ,
तब गृहस्थ आश्रम में प्रवेश की आयु
पच्चीस वर्ष होती थी ।
अब आदमी के जीवन की औसत उम्र
घटते-घटते अस्सी साल रह गयी है
तब आज विवाह की औसत आयु
बढ़ते-बढ़ते तीस वर्ष हो गयी है
आज की युवा पीढ़ी
कैरिअर की चिन्ता में
तनाव में जी रही है और
चढ़ती जवानी को
तीस तक की उम्र को
कुँवारे रहकर गुजार देती है ।
डॉ. कविता त्यागी