मेरे जीवन में प्रेम का आगमन ठीक वैसा ही था..
जैसे, किसी रोज जाड़े की चमचमाती धूप में, बारिश का आना।
जैसे, किसी सुबह, मुरझा चुके पौधे पर अचानक फूलों का खिलना।
जैसे, किसी छोटे बच्चे का अचानक ही नींद में झटके से जागना।
जैसे, किसी तपती दोपहरी रेगिस्तान में पानी का मिलना..
समझ गए ना??
बिल्कुल अकल्पनीय एहसास।
अचानक जब तुम मेरे सामने आ गए, तो जैसे एक झटके में.. मैं जीती जागती मोहब्बत के सामने खड़ी थी।
मानो मोहब्बत अब कोई शब्द नहीं रहा, बल्कि वह तुम्हारे रूप में मेरे सामने था।
तुम्हें शायद यकीन नहीं होगा, मगर मैं तुम्हें देख भर लेने से बेइंतहां ख़ुश हो जाती हूँ। तुम मेरे लिए किसी असम्भव ख़्वाब की तरह हो..
जिसे मैं देख सकती हूँ, मगर जी नहीं सकती।
और तुम्हें पा लेना तो आसमान से तारे तोड़ने जैसा है।
क्योंकि, तुमने कभी नहीं कहा कि तुम मुझे पसन्द करते हो..... तो तुम्हें मुझसे मोहब्बत हो यह तो बिल्कुल ही नामुमकिन है।
मगर मैं अब तक उस एहसास को जी रही हूँ, जो मुझे तुम्हारे करीब से गुजरने पर महसूस होता था और तुम्हारी अनावश्यक सी बातों से झलकता था।
और शायद यही एहसास मुझे तुमसे जोड़ कर रखता है।
लगता है जैसे कोई डोर है जो मुझे खींच-खींच कर तुम्हारे सामने लाकर खड़ा कर देती है।
हाँ, मैं जानती हूँ यह मेरा भ्रम भी हो सकता है..
मगर मैं ख़ुश हूँ अपनी इस अनकही मोहब्बत में, बहुत ख़ुश।
ठीक है ना अगर कभी-कभी दिल के किसी कोने में मुझे तकलीफ होती है। अगर, नींद में कभी मेरी आँखें भीग जाती हैं....।
तो क्या हुआ अगर मैं तुम्हें देख कभी पलट कर अपनी उलझी हुई लकीरों में तुमको तलाशती हूँ।
तो क्या हुआ अगर तुम्हारे नाम को मेरे नाम के साथ लिख कर मिटा ही नहीं पाती हूँ।
मगर मैं ख़ुश हूँ.. क्योंकि मेरी यह मोहब्बत की दुनिया मुझे तुम्हारे ना होने पर भी, होने का ख़ूबसूरत एहसास कराती है।
यह एहसास बिल्कुल ऐसा है जैसे किसी ओस से भरी हुई नर्म घास पर नंगे पाँव चलना।
और तुम..?
तुम बिल्कुल उस समुन्दर की तरह हो,
जिसके किनारे बैठ उसे निहारना तो मुमकिन है,
मगर जिसे खुद में समेट लेना.. मुमकिन नहीं।
~रूपकीबातें❤️
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