अगर हम अपने आप से जुडकर सबको जैसें हैं वैसें स्वीकार करते है और सबके प्रति सिर्फ प्रेम की भाव सें देखने लगते हैं तो अपने अंतर आत्मा की ज्योत जाग जाती है। ये अपने अंदर की प्रकाशमान ज्योतसें अपनी चेतना शक्ती जागृत होकर जीवन प्रसन्न और आनंदमय हो जाता हैं। ये आनंदमय अवस्था हमेशा अपने साथ जुडी रहती हैं।
#ज्योत