सबको अधिकार है मुस्कुराने का और उदासी को कुछ देर के लिए ही सही, मगर भूल जाने का..
मेरा बस चलता तो सबके हिस्से में ख़ुशियों का इत्र छिड़क देती, और सबके जीवन को महका देती।
वो जो अंधेरे में बैठे हैं, उन्हें खींच कर लाती उजाले में और कहती तुमसे सभी बहुत प्रेम करते हैं।
तुम्हारी मुस्कुराहट बहुत खास है, बहुत ख़ूबसूरत है।
मुझे मुस्कुराहट की तारीफ़ करने वालों पर बहुत प्यार आता है। क्योंकि ये मुस्कान को महत्व देते हैं।
सच कहूँ तो मैं एक बहुत बड़ा बगीचा बनाना चाहती हूँ मेरे आँगन में,
फूलों से भरा हुआ.. महकता हुआ।
फिर रोज कुछ फूलों को भेज दिया करुंगी उनको, जिन्हें मुस्कुराने की कोई वज़ह नहीं मिलती.. जो उदास और बिखरे हुए हैं।
देना चाहती हूँ मैं, हर एक उदास इंसान को खिली हुई पंखुड़ियां.. ताकि वो नाजुक पंखुड़ियां बिखरे हुए लोगों की झोली में गिरकर खुशबू छोड़ दें।
हर दिन सबको एक वज़ह तो मिले मुस्कुराने की।
सबके हिस्से में खुशबू भरी महकती हंसी होनी चाहिए..।
है ना..?❤️🌻
~रूपकीबातें
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