जब कोई बात बिगड़ गई हो ,
काफ़ी मुश्किलियों का सामना करना पड़ा हो ,
तब वक्त सोचने नहीं देता की क्या सही है या क्या ग़लत,
सिर्फ़ ओर सिर्फ़ प्यार ओर यादों मैं उलज जाते है हम,
ओर भूल जाते है की कुछ निभाना भी था हमें , कुछ बन कर दिखाना भी था हमें ।
लेकिन दोस्तों, प्यार से सिर्फ़ रिश्ते नहीं निभाए जाते, रिश्ते तो चलते है विश्वास से !
ऐसे रिश्ते आगे चलाने से डर पनप सा जाता है, पर प्यार वही का वही थम सा जाता है।
इस प्यार भरे डर मैं विश्वास को जगाना बहुत ज़रूरी है, यह विश्वास सिर्फ़ ओर सिर्फ़ एक दूसरे को समज कर ओर सुलझा कर जिता जा सकता है , फिर एक दिन डर अपने आप पीछे छूट जाता है ।
यही कुछ डर भरे प्यार की ,, या तो कहिए प्यार भरे डर की उलझन में फँसे लोगों के लिए कुछ पंक्तिया......