ले चल मुझे ए सफर
जहां पर मुझे कोई जनता ना हो ।
सबसे दूर कहीं
जहां पर कोई अपना ना हो ।
आज कल के रिश्ते
मुझे समझ ही नहीं आए अब तक,
पहले अपना अपना कहेके
पास ले जाते है ,
और फिर पास जाते ही
इतने दूर हो जाते है
और हमें तन्हा कर देते है।
ले चल मुझे ए सफर
जहां पर मुझे कोई ना जाने ,
ना में और किसी को ।
ले चल मुझे कहीं और तो ले चल ।