सारे जग की बातें हर वक़्त सुनते रहते हो
अपने भीतर की आवाज सुनना सिख लो
सारे जग से सब कुछ हर वक्त कहते हो
अपने आप से भी कुछ पुछना सिख लो
सारे जग का निरिक्षण हर वक़्त करते हो
अपने आप का निरिक्षण करना सिखलो
सारे जग की गलतीयां ढुंढते रहते हो हर वक़्त
अपने आप की गलतीयां ढुंढ ना भी सिख लो
सारे जग कि बुराइयों देख ते रहते हो हर वक़्त
अपनी खुद कि बुराइयों भी तो छोड़ ना सिख लो
Anil mistri
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