इस मिट्टी की आन की खातिर , खुद को मिटा देंगे हम
अपने तिरंगे की शान की खातिर , निकले चाहे मेरा दम
इस मिट्टी का कर्ज़ है मुझपर , जितना भी चुकाऊं है कम
हंसते - हंसते जीवन करूं अर्पण , रहे न फिर कोई गम
कोई भी हो देश का दुश्मन , कितना भी है रख्खे दम
चैन नहीं लेने देंगे हम , जब तक उनकी सांसे न जाए थम
कसम मुझे मेरी मिट्टी की , अब न कोई आंख होगी नम
दुश्मन की टेढ़ी नज़रों की खातिर , बन जाऊंगा खुद यम
देश के अंदर भरे पड़े हैं , दीमक बन रहे नराधम
सर्वनाश इनका है शुभ , खाई है मैंने इसकी कसम
देशप्रेम नश - नश में समाया , इसे और फैलाए मेरी कलम
डरपोक नहीं उनके जैसे , जो रटते रहते मेरे पास है बम
हम एक रहें सब मिलजुल कर , सदा साश्वत रहे ये देश और हम
#मिट्टीकी