कुछ लोग होते हैं
जो तय नहीं कर पाते,
चाय या कॉफी,
पहाड़ या समंदर,
दिनकर या फैज़ में बेहतर कौन ?
ये तय नहीं कर पाते
आटा की चक्की बनाने वाला वैज्ञानिक
और भूख पर पहली कविता लिखने वाले कवि में
किसे जीनियस माना जाए ?
इन्हें परेशानी होती है हर उस सवाल से,
जिसमें शामिल होता है , अंग्रेजी का शब्द 'फेवरेट'
और उस इंसान से जिसने बचपन कभी पूछा होता है
कौन ज्यादा प्यार करता है :
मम्मी या पापा ?
ये तय नहीं कर पाते
बच्चन की मधुशाला या मेहदी हसन की ग़ज़ल
किसमें सुकून तलाशें?
इसलिए ये सुन लेते हैं बारी-बारी दोनों को।
इन्हें बस जीना होता है इंस्टॉलमेंट्स में सब कुछ ,
जानना होता है सबकुछ
वेदों से ब्लॉकचैन तक।
ये तय नहीं करते यह सब
क्योंकि बहुत पहले ये जान चुके होते हैं
कि ये तुलनायें आपको बाँधती हैं,
और जीया नहीं जा सकता इन संकुचित दायरों में।