जिस दिन जनम लिया
उस दिन से पराई केहेलाई
तू तो धन है पराए घर का
वो तो बचपन से सुनती आईं
हर हालत में कोशिश की
उसने मॉ बाप का बेटा बनाने की
कहते रहे फिर भी सभी
तू तो अमानत है किसी और कि
धीरे धीरे समझ गई वो
लड़की का जन्म ही है ऐसा
ना ससुराल है हक का
ना अपना का है उसका मायका
जमाना गुराज गया उसने
छोड़ दी अपनी कोशिशे
कुछ ऐसी ज़िंदगी काट रही वो
क्या यह मृत्यू से कम हैं?
#मृत