क्या महिमा मैं शिव की गाऊं
वो तो हैं अनंत अविनाशी
वही हैं बैठे अमरनाथ में
वही हैं बैठे जाकर काशी।
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बेल पत्र और एक लोटा जल
जो कोई श्रद्धापूर्वक चढ़ाता है,
कृपा प्रभु की उस पर होती
वो आगे ही बढ़ता जाता है।
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घास बन कर भी जिन्दगी काट लेंगे
मेरी ख्वाहिश नहीं है की फूल बन जाऊं,
मुझ पर अपना हाथ बनाये रखना प्रभु
तमन्ना यही है कि तुम्हारे चरणों की धूल बन जाऊं।