कभी न खत्म होने वाला
माँ के छोर में बंधा ए टी एम्
आज मुसीबत के वक्त
बहुत याद आता है।।
खुद को समेटते हुए
बिखरने लगता हूँ जब
पिता का हौसला
बहुत याद आता है।।
याद आता है ममता की
छाँव में बीता हुआ बचपन
भाई बहनों का प्यार
बहुत याद आता है।।
आज मेरे पास घर तो बड़ा
पर सूना हर कोना है
एक खामोश शोर यहां
मुझको डराता है।।
अब तो याद हैं आते मुझे
गांव के वो प्यारे मित्र
और खुशियों से भरा आँगन
बहुत याद आता है।
स्वरचित
जमीला खातून