#नट
निःशंक अद्भूत रहा होगा
तुम्हारा आगमन!
सर्वत्र हास्य की गूँज,
और साथ में थी;
तुम्हारे निष्कारण रुदन की भयानकता!?
अस्तित्व बनाये रखना हो
या टिकाये रखना,
तुम अविरत वीर हो।
तुमने श्रृंगार से सृष्टि का सर्जन किया,
और पुनः अद्भूत हो गए!
प्रकृति का बीभत्स स्वरुप
स्वीकार कर,
करुणता के पाश में भी
तुम वीर बने रहे!
अपने रूद्र को, तुमने निरंतर
अपने शांत से शांत करा!
क्या हो तुम?
नौ रस दिखाने वाले नट या
नौ रस जीने वाले नट सम्राट?
© लीना प्रतीश