हर शाम ढल जाती है तेरे बिना
अकेला हो गया हूं बोहोत में तेरे बिना.
लोग कहते है मर्द रोया नहीं करते.
देख आज फिर से रोया हूं में तेरे बिना.
क्यू याद नहीं आती तुझे उन लम्हों की.
तुझे कुछ ना दिखता था मेरे सिवा
मुझे कुछ ना भाता था तेरे सिवा.
बस अब आजा इन दूरियों को तोड के.
नहीं रहा जाता अब तेरे बिना.
हार्दिक बोरिचा.
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