"तू"
यूं "बेवक्त"जाया ना कर.
इस दिल को "तड़पाया" ना कर.
खुली किताब हूं "पढ़ले" मुझे
पर पढ़के फिर पन्नों को "जलाया "ना कर.
तू नहीं जानती इस "दीवाने" की हालत.
"दर्द की अमीरी" को बढ़ाया ना कर.
आंखो में है तू सिर्फ "तू".
"आंसू" बनकर इसमें आया ना कर
बड़ी "पाक" सी है "मोहब्बत" मेरी ए जालिम.
इसे अपनी "बेवफाई" से आजमाया ना कर
"सपनो में आती हो
दिन में खो जाती हो"
रातों को इतना "रुलाया" ना कर..
यूं मुझको "सताया" ना कर
तू यूं "बेवक्त" जाया ना कर.😔
तुम्हारा हार्दिक
💔