शिक्षा का लेना-देना अब व्यापार बन गया है
विद्या का मंदिर धन का पारावार बन गया है
शिक्षा में आज मूल्यों की कोई जगह नहीं है
जैसेकि मानव-धर्म की कोई वजह नहीं है
त्याग-तपस्या छूटे भ्रष्टाचार तन गया है
शिक्षा का लेना देना व्यापार बन गया है
शिक्षा ऐसी हो , जो बच्चों को मिलकर जीना सिखाए
अपने ही नहीं , गैरों की खातिर भी जीना सिखाए
लेकिन शिक्षा का लक्ष्य अब रोजगार बन गया है
शिक्षा का लेना और देना व्यापार बन गया है
छोटे-बड़े का भाव न उपजे , बहूमूल्य हर जन हो
मानवता की तुलना में तुच्छ , भौतिक सुख और धन हो
लेकिन अब शिक्षा धनार्जन का सशक्त आधार बन गया है
शिक्षा का लेना और देना व्यापार बन गया है