ऐ जिंदगी में यहाँ तू पता नही कहाँ,
तेरे सिवा सब मिलते हैं पर तू नही मिलती ...
छिपकर मुद्दतों से कहीं खो गई हो तुम
और ढूंढने की हमे फुर्सत नही मिलती...
एक पल में मौसम बदल जाता है यहाँ,
इस खामोशी में भी शांति नही मिलती
में अक्सर रातों को उठकर रोता हूँ,
तारे हंसते हैं मुझपर,मगर चांदनी नही मिलती...
यूँ तो ज़िंदा हैं सभी यहाँ मगरूरी में या मज़बूरी में,
दिलों में मगर अब किसी की धड़कन नही मिलती...
इस तरफ इबादत है उस तरफ खिलाफत है,
दोनों तरफ गज़ब की ताकत है,
भीड़ इतनी है कि कहीं जगह नही मिलती...
यूँ तो कहने को हर शय मौजूद हैं
मगर सिर्फ एक वही नही मिलती...
हाय क्या बदलाव आया ऐ " अतुल "
किसी की भी शक्ल अब पहले से नही मिलती...👍
अतुल कुमार शर्मा "कुमार"