#सोचkyaरहेho ?
जी ले खुद से छूट के,
ला के कुछ अरमान मिल!
तु ना उत्तरदायी है,
पहले से पहचान मिल।
चक्रव्यूह यहां ढेरों है,
तु चढा के बाण मिल।
एक भी वार ना खाली हो,
बनकर तु चट्टान मिल!
तुझ पर जो उंगली उठे,
वहीं पूछकर सवाल मिल।
उपर उपर झटकाये जो,
वहां बन बाल की खाल मिल!
चित्रगुप्त दरबार में,
लेकर एक प्रस्ताव मिल।
बाजु उल्टा कर देखे,
देकर यह सुझाव मिल!
भरी निंद में आउ जब,
बनकर तु एक ख्वाब मिल!
विरानी बढते जाए तब,
बनकर तु गुलाब मिल!
घर की चौखट पर रखी,
घंटी को पुकार मिल।
बाहर दुनिया में जो है,
सपनो को साकार मिल...
© लीना प्रतीश