#एzindgiतू ,
बादल बरखा बिजली बन
फूल पत्तियाँ तितली बन
अग्नि पानी पर्वत बन
भूमि की हरियाली बन
सूरज चाँद हवायें बन
तारों सी चमकीली बन
तेज धूप की गर्मी बन
सर्दी की बर्फीली बन
मीठी तीखी और नमकीन
जरा जरा सी इमली बन
सारी बातें मान न ले
मौकोे पर हठीली बन
सीधी सादी अच्छी है
कभी-कभी भड़कीली बन
दबी दबी मुस्कान नहीं
खिली खुली अठखेली बन
भले रहे पहले जैसी
बस थोड़ी नवेली बन
© लीना प्रतीश