#माया
मन मर्कट सब बारी बारी,
नयन नदी सब खारी खारी |
गोल परिधि सीधा करती,
आडी टेढ़ी रेखा सारी |
मीठी मीठी मुँह पर होती,
पीठ पीछे सब होती गारी ;
उपर दिखता है जो उजला,
नीचे छिपती है सब कारी !!
प्रीत करे और जोर लगाए,
छुट जाए सब बारी बारी,
लंबी राह मजल जो काटे ;
उस पर सब दुनिया है वारी |
आस ईच्छा सबहू को फैंकी,
अंदर फिरती है सब भारी |
माया, मोहनकी ; लग जाए ?
मोहनकी, माया ; सब हारी...
© लीना प्रतीश