#सक्षम
हमें उम्मीद थी कि वो हमारी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा
पर पिता के घर से बेटी के साथ समान भर के लाने की ख्वाहिश ने उसकी ....मुझे गलत करार दिया
उन ख्वाहिशों का तो पता ही नहीं कहा गई ...बस उस घर के लोगो की उम्मीदों पर खरा उतरने का भूत सवार था
वो ताने वो परिहास उन सब का सहा हमने तो क्या हुआ.... उनके इसी व्यवहार ने हमें अपने लिए जीना सीखा दिया
भरोसा उसको नहीं था ख़ुद की काबिलियत पर तो क्या हुआ
उसकी इसी गलती ने मुझे ख़ुद के पैरो पर खड़े होने के # सक्षम बना दिया .....RITU की कलम से✍️