मैं गाँव की सुबह को रात के ख्वाबों से जोड़ रहा हूँ,
जाने कितने लापरवाह से ख्याल हैं जिसे तोड़ रहा हूँ,
मेरी लिखी किताब में पोशीदे पन्ने की कमी है शायद,
तो मैं अपनी किताब से बीच के पन्ने मोड़ रहा हूँ,
अब थक गया हूँ मैं फ़िज़ूल बे-फ़िज़ूल के इस बहस से,
दिल की मर्ज़ी है तो,ये कहानी मैं यहीं पर छोड़ रहा हूँ!
💔
पागल दिवाना
@pagal.deewana.11