इस सृष्टि में सब कुछ सुरक्षित हम तभी रख पाएंगे
संतुलन का सूत्र जब तक हम सभी आजमाएंगे
प्रकृति की हो बात चाहे आदतों की बात हो
जंगली पशु हों कोई या आदमी की जात हो
आपसी संबंध हों या दूसरों का साथ हो
दूसरों का काम हो जहां अपना कोई हाथ हो
खान - पान की आदतें हो या जीने कि कोई बात हो
कब और कैसे हम रहें दिन हो या रात की बात हो
बड़े छोटे रिश्ते नाते यार दोस्त की बात हो
मीठे - कड़वे अनुभव हों या किसी से घात हो
घर, मुहल्ला,गांव , जनपद जिला या प्रदेश हो
इस अखिल विश्व के साथ में अपना भारत देश हो
हैं तभी तक सभी साश्वत संतुलन यदि बना है
असंतुलित कुछ हुआ तो परिणाम सिर्फ वेदना है
संतुलन सबसे जरूरी जीवन के हर मोड़ पर
जिंदगी उलझे सदा ही संतुलन को छोड़ कर
#संतुलन