इन वीरान वादियों मे क्या पसंद मुझे
दूर तक, देर तक तू देखा करें
मेरी बनाई मूरत तुम्हे ना पसंद है
मुझे तेरे दीदार से ही आराम मिला करें
अब रहने भी दे ये नज़ाक़ते ये नाज़ मुझे तेरी सादगी से ही चाहत मिला करें
मे तेरे इश्क़ के आगाज़ से ही खुश हु
क्यू हरदम तू मुझे अपनी रूह से वाकिफ किया करे..