ऐ मुसाफिर तुझे चलते रहना है
हर कदम पर खड़ी मुसीबतों,
को तुझे हंस कर सहना है
भले ही गिरना पड़े हज़ार बार तुझे,
पर हर बार एक बड़ी मुस्कान के साथ,
तुझे उठते रहना है।
ऐ मुसाफिर तुझे चलते रहना है।
कोई नही देगा यहाँ साथ तेरा
इस वीरान राहों में अगर कोई है,
तो वो है ज्ञान तेरा
जो हर जगह देगा साथ तेरा।
जन्म से मृत्यु के इस पथ में,
तुझे अकेले ही सफ़र करना है
ऐ मुसाफिर तुझे चलते रहना है।
काँटे मिलेंगे हज़ार राहों में
परन्तु,
कांटो को छोड़ तुझे,
फूलो पर ध्यान देना है।
कलियों की खुशबू से फैले उस,
मीठे स्वाद का आनंद लेना है।
ऐ मुसाफिर तुझे चलते रहना है
तुझे चलते रहना है।