देश का रंग चढ़ा हो जिसपर,
उसे तिरंगे में लिपटना ही भाता है,
और वीरगति को पाकर भी,
वो जग में अमर हो जाता है।
वीर शहादत उसकी, जुबां पर कुछ दिन आती है,
मीडिया में भी छाती है, फिर जाने कहाँ गुम हो जाती है,
क्या बीतती होगी उनपर, जिनका सहारा छिन गया,
माँ-बाप ने बेटा खोया, बेटे का नायक रुखसत हुया,
और उस सिन्दूरी मांग पर, जो बेरंग सूनी हो जाती है,
लेकिन यहाँ बलिदान पर, बस सियासत खेली जाती है।