मैं कोई गजल लिख रहा हूं....
.
यह उगता सा सूरज यह ढलती सी रातें
यह गाती हुई चिड़िया, यह मोहब्बत की बातें
इस मीठी सी सर्दी में मिलने की चाहत
तेरा नाम सुनकर मिलने वाली राहत
सब यादें हैं तेरी जो मैं लिख रहा हूं
मैं फिर तेरे प्यार में कोई ग़ज़ल लिख रहा हूँ |
वह आंखों में तेरी समंदर सी रंगत,
चेहरे को तेरी है फूलों की संगत
वह जुल्फों में तेरी घटा का बरसना,
मिलने को मुझसे तेरा यह तड़पना
सब फिजाएं हैं तेरी जो मैं लिख रहा हूं|
मैं फिर तेरे इश्क में ग़ज़ल लिख रहा हूं
वह रातों को चलती लंबी मीठी बातें,
मिलने को तड़पाती यह सर्दी की रातें
तेजी से चलते उस दिल का धड़कन,
माथे से तेरी वह चुनरी सरकना
अदाएं है तेरी जो मैं लिख रहा हूं
फिर तेरे इश्क में कोई गजल लिख रहा हूं|
वो नज़रें झुका करके, मुस्काके मिलना
वह गालों की कलियों का शर्मा के खिलना,
वह भीड़ में मुझको, तेरा संग लेकर चलना
बाहों में मेरी, तेरा वह पिघलना
सब रजाए है तेरी जो मैं लिख रहा हूं,
ले फिर से मैं कोई, गजल लिख रहा हूं |
कहना वो तेरा की, " संग मैं रहूंगी"
तुम जैसे भी रखना, मैं कुछ ना कहूंगी,
मां और बाबा को भी हम समझा लेंगे
जो सच्चा है इश्क, वह कुछ ना कहेंगे
सब बातें हैं तेरी जो मैं लिख रहा हूं;
मैं यादों में तेरी गजल लिख रहा हूं |