काफ़्का की डायरी से...
लिखने का मतलब है, अपने को अतिरेक में दिखाना, इसलिए लिखते समय कितना ही अकेलापन हो, वह काफी अकेलापन नहीं है, कितनी ही खामोशी हो, वह काफी खामोशी नहीं है, कितनी ही रात हो, वह काफी रात नहीं है, लिखते समय सारा समय भी कम समय है क्योंकि सड़कें लम्बी हैं- और कभी भी रास्ते से भटका जा सकता है।