मैं आगे बढ़ता गया
ऊंचा उठता गया
और दूर, बहुत दूर तलक
उड़ने लगा
पकड़ने, छूने नए आसमां
नज़रों में दूसरों की
मैं उन्नति पथ पर चढ़ने लगा
पर मन रह गया
कहीं पीछे, अकेला
और इस बढ़ने के साथ
पीछे छूटते गए कई हाथ
मन करता है कि
वापस लौट आऊं
फ़िर उसी
छोटी सी दुनिया में
जहां के आसमां
बस मेरी छत तक हैं
और
हाथ भर के फासले पर
रहती हैं सारी खुशियां
:- भुवन
#उन्नति