यह कैसी उन्नति, कैसा विकास,
हो रहा निरन्तर मानवीय संवेदनाओं का ह्रास,
कोई दुर्घटनाग्रस्त गिन रहा अंतिम श्वास,
लोग मदद की बजाय ले रहे तस्वीर
कहीं कर रहे किसी की बेबसी का उपहास,
कभी छुद्र स्वार्थवश खंडित करते हैं विश्वास,
हे मानव रखो हृदय में दया, प्रेम का वास,
ले जाएगा काल एक दिन बांध के यमपाश।
#उन्नति