सपने बो छोटे थे ख्वाहिशें भी न थी बड़ी
ख़ुशियों संग जीते थे साजिशें न थी कहीं
रिश्ते समझ आने लगे जब ये उम्र बड़ी
अपनों संग रह न सके जरूरते जब बड़ी
जिंदगी की राहों में महसूस हुई कमी बड़ी
इक झलक प्यार की दिखला ग़ुम गई बो कहीं
धड़कने सहम गई देख हरकतें जिंदगी की
आस के पंछी उड़ गए छूट गई सांसें कहीं
ग़ुम गई राहे सारी की सारी कहीं
रह गए सारे मुसाफ़िर तनहा यहीं
- Rj krish